ज्वारीय ऊर्जा क्या है? ( Jvaareey Oorja kya hai )

ज्वारीय ऊर्जा क्या है? ( Tidal Energy )

यह ऊर्जा जल विद्युत का एक रूप है जो ज्वार से प्राप्त ऊर्जा को मुख्य रूप से बिजली के उपयोगी रूपों में परिवर्तित करती है । समुद्र में आने वाले ज्वार-भाटा को टर्बाइन लगाकर विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है । इसमें दोनो अवस्थाओं में विद्युत शक्ति पैदा होती है , जब पानी ऊपर चढ़ता है तब भी और जब पानी उतरने लगता है तब भी इसे ही ज्वारीय शक्ति ( Tidal Energy ) कहते हैं । यह एक अक्षय उर्जा का स्रोत है । भारत में खम्भात की खाड़ी , कच्छ की खाड़ी ( गुजरात ) और सुन्दरवन ( पश्चिम बंगाल ) में ज्वारीय ऊर्जा की संभावनायें हैं ।

ज्वारीय ऊर्जा का उपयोग ( Use of Tidal Energy )

अभी भी बहुत कम हो पाया है क्योंकि इसमें भविष्य के लिये अपार उर्जा उत्पन्न करने की क्षमता समाहित है । ज्वार-भाटा के आने और जाने का समय काफी सीमा तक पहले से ही ज्ञात होता है , जबकि इसके विपरीत पवन उर्जा और सौर उर्जा का पूर्वानुमान थोड़ा कठिन कार्य है ।

ज्वार-भाटा के उठने और गिरने से शक्ति उत्पन्न होने की बहुत से वैज्ञानिकों का ध्यान समय समय पर आकर्षित हुआ है , और उसको काम में लाने की अनेक योजनाएँ समय समय पर बनी हैं । लेकिन जो योजना आज सफल समझी जाती है , वह ज्वार बेसिनों का निर्माण है । ये बेसिन बांध बांधकर या बराज बनाकर समुद्रतटों के आसपास बनाए जाते हैं । ज्वार आने पर इन बेसिनों को पानी से भर लिया जाता है , फिर इन बेसिनों से पानी निकालकर जल टरबाइन चलाए जाते और विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है ।

ज्वारीय ऊर्जा के लाभ ( Benefits of Tidal Energy )

  • यह असमाप्य है ।
  • यह प्रदूषण मुक्त है ।

ज्वारीय ऊर्जा से हानि ( Loss From Tidal Energy )

  • इससे समुद्री जीवों को नुकसान पहुँचता है ।
  • इसके उत्पादन में कठिनाई आती है ।

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