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जैव सन्तुलन क्या है? ( Jaiv santulan kya hai ) 

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  • Post category:Biology
  • Post last modified:December 26, 2020
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इस लेख में जैव सन्तुलन ( Biotic balance ) विषय से सम्बन्धित सभी जानकारी मिलेगी जैसे कि – जैव सन्तुलन क्या है? ( Jaiv santulan kya hai ) आदि । तो चलिए आगे जानते है इन सभी प्रश्नों के बारे में ” उत्तर “

जैव सन्तुलन क्या है? ( What is biotic balance ) 

प्रकृति का जैव सन्तुलन ( Biotic balance of nature ) 

सभी जीवों का दूसरे जीवों के साथ एक निश्चित सम्बन्ध रहता है । हर एक जीव के जीवन पर अन्य जीवों का भी प्रभाव पड़ता है । इसीलिए , प्रकृति को हम एक विशाल जैव – समाज कह सकते हैं । 

सभी जीव अपने वातावरण से श्वसन के लिए हमेशा ऑक्सीजन ( O2 ) लेते हैं और बदले में कार्बन डाइऑक्साइड ( CO2 ) छोड़ते हैं । लेकिन फिर भी प्रकृति में कभी ऑक्सीजन ( O2 ) की कमी नहीं पड़ती है और ना ही वायुमण्डल कार्बन डाइऑक्साइड ( CO2 ) से पूरी तरह से दूषित हो पाता है । 

इसी प्रकार , अनगिनत पेड़ – पौधे भोजन और पोषक पदार्थों के निर्माण के लिए प्रकृति से नाइट्रोजन एवं लवण तथा वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड ( CO2 ) हमेशा लेते रहते हैं । लेकिन फिर भी इन पदार्थों की कमी नहीं होती है और पेड़ पौधे उगते ही चले जाते हैं । 

इसी प्रकार , अनगिनत जन्तु भोजन के रूप में कार्बोहाइड्रेट्स , प्रोटीन्स , बसा , लवण आदि का निरन्तर उपभोग करते रहते हैं । लेकिन फिर भी प्रकृति में इन पदार्थों की कमी नहीं पड़ती है । 

यह सब क्यों? इसलिए नहीं कि प्रकृति का भण्डार असीमित है । बल्कि इसलिए कि जन्तुओं और पौधों के बीच इन पदार्थों का चक्रीय उपभोग होता है । 

पौधों के आवश्यक जरूरी पदार्थों को पूरा जन्तु करते हैं और जन्तुओं के आवश्यक जरूरी पदार्थों को पूरा पौधे करते हैं । इस तरह से , प्रकृति का सीमित भण्डार ही लौट फिरकर बार बार जीवों द्वारा उपयोग में लाया जाता है और यह कभी समाप्त नहीं होता है । 

बड़े जन्तु छोटे जन्तुओं को और छोटे जन्तु कीड़े – मकोड़ों को खा सकते हैं । लेकिन जन्तु बड़ा हो या छोटा , इसका भोजन सीधे या घुमा – फिराकर हरी वनस्पतियों से ही प्राप्त होता है । क्योंकि प्रकृति में हरी वनस्पतियाँ ही पोषक पदार्थों का संश्लेषण कर सकती हैं । इसीलिए पादपों को स्वपोषी ( autotrophic ) तथा जन्तुओं को परपोषी ( heterotrophic ) कहा गया है । 

हरे पौधों के द्वारा प्रकाश – संश्लेषण में बनाए गए पदार्थों से स्वयं इनका पर्णहरिमरहित पौधों का तथा सभी जन्तुओं का पोषण होता है । इसीलिए , इन्हें जीव – जगत् के उत्पादक ( producers ) और जन्तुओं को उपभोक्ता ( consurmers ) कहते हैं । प्रकाश – संश्लेषण के लिए पौधे वायुमण्डल से जितने मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड ( CO2 ) और मिट्टी से जल एवं लवण लेते रहते हैं । उसकी पूर्ति क्रमशः जन्तुओं के श्वसन तथा मल – मूत्र एवं मृत शरीरों से होती रहती है । 

इसी प्रकार , जन्तु जितनी मात्रा में ऑक्सीजन ( O2 ) और पोषक पदार्थों का उपयोग में लेते हैं उसकी पूर्ति पौधों के प्रकाश – संश्लेषण से होती रहती है । लगभग पृथ्वी के वायुमण्डल में मौजूद ऑक्सीजन ( O2 ) की कुल मात्रा को हरे पौधे लगभग 2000 वर्षों में छोड़ते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड ( CO2 ) की कुल मात्रा को लगभग 300 वर्षों में खतम करते हैं ।

तो इस तरह से पदार्थों के चक्रीय उपभोग के कारण प्रकृति में इनकी कभी कमी नहीं पड़ती है , और जीवों को ये हमेशा मिलते रहते हैं । इसी को ” प्रकृति का जैव – सन्तुलन “ कहते हैं ।

तो दोस्तों , आशा करता हूँ की इस लेख में दी गयी सभी जानकारी जैसे की — जैव सन्तुलन क्या है? ( Jaiv santulan kya hai )  आदि प्रश्नों का उत्तर आपको अच्छे से समझ आ गया होगा । और यदि आपका कोई सवाल या कोई सुझाव है । तो हमें कमेंट्स करके जरुर बतायें हमें आपकी मदद करने में बहुत ख़ुशी होगी । [ धन्यवाद्…]

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