वैदिक काल? इतिहास एवं प्रकार! ( Vaidik Kaal )

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वैदिक काल? ( Vedic Period )

वैदिक काल :— आर्यों के द्वारा निर्मित सामाजिक-सांस्कृतिक तथा आर्थिक व्यवस्था वैदिक संस्कृति ( Vedic Culture ) के रूप में जानी जाती है । 1500 ई.पू. से 600 ई.पू. के कालखण्ड को वैदिक काल ( Vedic Period ) कहा जाता है । इस सभ्यता के संस्थापक आर्य ( Arya ) थे , इसलिए इसे आर्य भी कहा जाता है । यहाँ आर्य शब्द का अर्थ है — श्रेष्ठ , उत्तम , उदात्त , अभिजात्य , कुलीन , उत्कृष्ट और स्वतन्त्र आदि । ईरान की पवित्र पुस्तक जेन्दावेस्ता और बोगजकोई अभिलेख से स्पष्ट होता है कि आर्य ईरान से होकर भारत आए थे । भारत आकर जिस क्षेत्र में बसे उसे सप्त सैन्धव प्रदेश कहा जाता है ।

आर्यों के जीवन को समझने के लिए इस काल को 2 भागों में बाँटा जाता है ;

( 1 ). 1500 ई.पू. से 1000 ई.पू. के कालखण्ड को ‘ ऋग्वैदिक ‘ या ‘ पूर्व वैदिक काल ‘

( 2 ). 1000 ई.पू. से 600 ई.पू. तक के कालखण्ड को ‘ उत्तर वैदिक काल ‘

( 1 ). ऋग्वैदिक काल ( Rigvedic Period )

ऋग्वैदिक काल :— इस काल की लगभग 1500 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व की जानकारी का स्रोत ऋग्वेद है । इस समय वैदिक आर्य अस्थायी जीवन बिताते थे , यह एक ग्रामीण व्यवस्था के अंग थे । ऋग्वेद आर्यों ने जिस बड़े क्षेत्र का निर्माण किया उसे सप्त सैन्धव प्रदेश कहा जाता है । ऋग्वेद में इस क्षेत्र को ब्रह्मावर्त और हिमालय की चोटी को मूजवन्त कहा गया है । ऋग्वेद में शर्थ , व्रत तथा गण सैनिक इकाइयों का उल्लेख है । पथी-कृत का प्रयोग अग्नि देव के लिए किया गया है । इस काल में राजा की कोई नियमित सेना नहीं थी ।

सप्त सैन्धव क्षेत्र में प्रमुख 7 नदियाँ प्रवाहित हैं , ये नदियाँ हैं — सिन्धु , सतलुज , रावी , चिनाब , झेलम , व्यास और सरस्वती नदी आदि ।

( 2 ). उत्तर वैदिक काल ( Post Vedic Period )

उत्तर वैदिक काल :— इस काल की लगभग 1000 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व की जानकारी के स्रोत तीन अन्य वेद ऋग्वेद के अलावा हैं — यजुर्वेद , सामवेद और अथर्ववेद । इस समय आर्यों का विस्तार पूर्व और दक्षिण-पूर्व की ओर होने लगा था और आर्य पंजाब से कुरुक्षेत्र यानी गंगा-यमुना दोआब में फैल गए थे । आर्यों ने स्थायी जीवन बिताना शुरू कर दिया था । इस समय पशुपालन की जगह कृषि को अधिक महत्त्व मिलने लगा , और उत्तर वैदिक आर्यों ने जिस बड़े क्षेत्र पर निवास किया उसे आर्यावर्त नाम ( Aryavarta Name ) दी गई । चित्रित धूसर मृद्भाण्ड और लोहा इस काल की विशिष्टता है ।

तो दोस्तों मुझे उम्मीद है कि इस लेख में दी गई सभी जानकारी जैसे — वैदिक कालिन इतिहास एवं प्रकार. आदि प्रश्नों के उत्तर अच्छी तरह समझ गए होंगे । अगर आपका कोई सवाल या सुझाव है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं. [धन्यवाद]

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